विद्यालय की जानकारी

स्थापना संबंधी जानकारी
डाॅ. रामदास वैष्णव शिक्षण समिति द्वारा संचालित सरस्वती उ.मा.वि. मंदिर कुरावर मण्डी का प्रारंभ वर्ष 1991 से धर्मशाला में प्रारंभ किया गया जिसमे नगर के 6 भैया /बहिनों से विद्यालय प्रारंभ तत्पश्चात् समिति के अथक प्रयास एवं समाज के लोगो के सहयोग से एक निजी मकान में किराए के भवन में विद्यालय चलाया गया। बाद में प्रांत के मार्गदर्शन एवं प्रबंध समिति के सहयोग से मार्केट विद्यालय हेतु जमीन खरीदी गई। व समाज सेविका श्रीमति सुशीला बाई के द्वारा विद्यालय को दान की राशि भेट की गई जिससे विद्यालय का निजी भवन निर्माण कार्य पूर्ण हुआ। जिसका शिलान्यास माननीय श्री कैलाश जी जोशी (वाणिज्य उद्योग एवं ऊर्जा मंत्री) के कर कमलों एवं श्री बापू जी सरदेसाई (संगठन मंत्री) स.वि.प्र. भोपाल श्री प्यारे लाल जी खण्डेलवाल एवं पूर्व सांसद के मुख्य अतिथ्य श्रीमति सुशीला बाई शर्मा (समाज सेविका ) की अध्यक्षता में दिनांक 06.04.1992 में संपन्न हुआ।

स्थापना के समय प्रबंध समिति अध्यक्ष श्री जगदीश जी वर्मा एवं व्यवस्थापक श्री कैलाश जी राज व प्राचार्य श्री ताराचन्द जी अमृृतिया व समिति के सम्मानीय सदस्यों के अथक प्रयास से संपन्न हुआ। विद्यालय में  11 कक्ष 1 कार्यालय का निर्माण हुआ। विद्यालय में समय से साथ – साथ पानी की समस्या को देखते हुए एवं कुआ व भैया / बहिनों हेतु पृृथक – पृृथक शौचालयों का भी निर्माण कराया गया। प्रारंभ में कक्षा अष्टमी तक की कक्षाएॅ थी। जो सन् 2006 में प्राचार्य श्री चैनसिंह बन्नासियां के समय हाई स्कूल की मान्यता मिली। व विद्यालय में कक्षा 10 तक विद्यालय संचालित हुआ।

विद्यालय में प्रतिवर्ष छात्र संख्या की वृृद्धि को देखते हुए भवन में पर्याप्त बैठक व्यवस्था न होने के कारण भैया/बहिनों की संख्या को देखते हुए। प्रबंध समिति के प्रयास के द्वारा अस्पताल परिसर के पीछे जमीन का क्रय किया गया। जिसमें नवीन भवन का निर्माण किया गया। जो बनकर सन् 2013 में तैयार हो गया। जिसमें पीने हेतु पानी का कुआ ,शौचालय,भैया-बहिनों हेतु पृृथक – पृृथक 9 कक्ष व 1 कार्यालय का निर्माण हुआ। प्राचार्य श्री राजकुमार जी तिवारी के समय भैया /बहिनों की नवीन भवन में कक्षा 6 से 10 तक विद्यालय संचालित होने लगा। प्राचार्य श्री राजकुमार जी तिवारी व प्रधानाचार्य श्री सुभाष चन्द्र जी दांगी के समय व प्रबंध कार्यकारिणी समिति विद्यालय परिवार के अथक प्रयास से सन् 2015 को विद्यालय को हायर सैकण्डरी की मान्यता मिल गई। एवं सन्् 2016 में कक्षा 11 वी व 2017 मंे 12 वी कक्षाएॅ संचालित होने लगी।जिसमें विज्ञान,गणित के भैया बहिनों को विद्यालय में अध्ययन हेतु कक्षाएं शुरू हुई कक्षा पूर्वार्द्ध से कक्षा द्वादशी तक वर्तमान छात्र संख्या 725 भैया/बहिन अध्ययनरत है। एवं 30 आचार्य ,दीदी अध्यापन कार्य संपनन्न कराते है।

2012 -13 में पा्रचार्य श्री वीरेन्द्र जी मण्डलोई के समय में ग्रामीण भैया/ बहनों ने प्रवेश शिक्षण को ध्यान में रखते हुए 1 बस का क्रय किया गया। व सन् 2016 में नगर के भैया/ बहनों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए एक मैजिक का भी क्रय किया गया। भैया /बहिनों के नवीन भवन में प्रार्थना हेतु सन्् 2017 में एक हाल का निर्माण करवाया गया। जिसमें भेया/बहिनो की सामूहिक प्रार्थना संभव हो सकी । सन्् 2016 की भैया/बहिनों की प्रार्थना हेतु साउण्ड भी क्रय किया गया। सन् 2016 -17 में नवीन भवन हेतु फर्नीचर की व्यवस्था की गई। जिसमें सभी भैया / बहिनों का फर्नीचर का लाभ मिला। पुराने भवन में कीचड की समस्या को देखते हुए। सन्् 2015 ‘-16 में पेवर्स लगाए गए। जिसमे भैया/बहिनों व भवन को कीचड की समस्या का हल हुआ। विद्यालय को समय – समय पर महापुरूर्षो की जयंतियां व शारीरिक प्रदर्शन ,पथ संचलन भी महापुरूषोे की जयंती पर निकाला गया। सन्् 2016 -17 बहिन स्वाती चन्द्रवंशी का अखिल भारतीय शारीरिक प्रतियोगिता में सहभागिता की एवं विद्यालय के गौरव को बढ़ाया सन्् 2016 -17 में शारीरिक प्रतियोगिता में 6 भैया / बहिनों को क्षेत्रिय स्तर पर सहभागिता करने का अवसर प्राप्त हुआ।

यह सभी उपलब्धियां विद्यालय परिवार के अथक प्रयास के द्वारा ही संभव हुआ हैं। विद्यालय परिवार द्वारा समय – समय पर भैया /बहिनो का सहासिक यात्रा देव दर्शन आदी स्थानों पर भैया / बहिनो को ले जाया जाता है। जिसमें भैया / बहिनो को देश संस्कृृति को समझने का अवसर प्राप्त होता है। एवं अपने अध्यापन में सहायता मिलती हैं ।

विद्यालय में भैया / बहिनो के विकास को ध्यान में रखते हुए। अभिभावक सम्पर्क, मातृृ सम्मेलन, मातृृ गोष्ठी , अभिभावक सम्मेलन व संास्कृृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। शारीरिक शिक्षा को ध्यान में रखते हुए। प्रतिदिन व्यायाम श्रृृंखला योग , खेल के कालांश का भी समावेश किया गया। जिसमे भैया /बहिन शारीरिक दृृष्टि से पूर्ण विकसित हो । अध्यात्मिक शिक्षा को ध्यान में रखते हुए संस्कृृति ज्ञान परीक्षा , निबंध लेखन प्रतियोगिता , बाला सभा , प्रार्थना गीत , प्रातः स्मरण गीत , एकात्मता मंत्र , एकात्मता स़्त्रोतम , राष्ट्रीय गीत व राष्ट्रीय गान भी प्रतिदिन भैया / बहिनो की दिनचर्या का हिस्सा है। संस्कृृत शिक्षा हेतु भैया / बहिनों के अध्यापन में कक्षा प्रथम से दशमी तक संस्कृृत विषय का अध्यापन आचार्य दीदीयों द्वारा कराया जाता है। प्रतिवर्ष संस्कृृत सप्ताह का भी आयोजन किया जाता है। भैया / बहिनों को संस्कृृत भाषा हेतु रूचि जागृृत हो इसका विशेष ध्यान किया जाता है।

योग शिक्षा का भी विद्यालय में प्रतिवर्ष 21 जून को अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता हैं । प्रतिदिन भैया / बहिनों को योग हेतु प्रेरित किया जाता है। विद्यालय में समय – समय पर योग के बारे में बताया जाता है। विद्यालय में भैया / बहिनों व आचार्य दीदीयोें के विकास हेतु प्रांत एवं विभाग के अधिकारियों का समय – समय पर मार्ग दर्शन किया जाता है। एवं शैक्षिक गुणवत्ता की दृृष्टि से आचार्य अभ्यास वर्ग , शिशु वाटिका वर्ग एवं बीच – बीच में कार्यशालाओ का आयोजन होता है। जिसमें शिक्षा की गुणवत्ता के आधार पर भैया / बहिनों का उचित मार्गदशर्न होता है।

प्रतिवर्ष भैया / बहिनों द्वारा समाज के सहयोग से वनवासी भैया / बहिनो के लिए समर्पण राशि भेजी जाती है। सन्् 2016 -17 मे भेजी गई राशि 63000 हजार रू. थी। जो अबतक भेजी गई राशि में सबसे अधिक है।
1. श्री दुर्गाप्रसाद जी लेवे ग्राम गणेशपुर द्वारा 31000 रू. दान स्वरूप दिये गए।
2. बियर फैक्ट्री द्वारा विद्यालय को 20 पंखे दान दिये गए।